पुलिस के पास गिरफ्तारी की शक्ति है, लेकिन कानून कुछ पदों और परिस्थितियों में विशेष सुरक्षा देता है। जानिए इससे जुड़े जरूरी नियम।
संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के दौरान विशेष संवैधानिक संरक्षण मिलता है। उनके कार्यकाल में गिरफ्तारी या कारावास की प्रक्रिया जारी नहीं की जा सकती।
राज्यपाल को भी पद पर रहते हुए संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत विशेष सुरक्षा मिलती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन पर कानूनी कार्रवाई कभी नहीं हो सकती।
भारत में मान्यता प्राप्त विदेशी राजनयिकों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गिरफ्तारी और हिरासत से विशेष छूट मिल सकती है। यह सुरक्षा उनकी राजनयिक स्थिति और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और कुछ उच्च पदस्थ विदेशी अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विशेष संरक्षण मिल सकता है। यह छूट हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में एक जैसी नहीं होती।
कानून से विवाद में आए 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया है। उन्हें सामान्य वयस्क आरोपियों की तरह नहीं रखा जाता; बाल न्याय व्यवस्था के नियम लागू होते हैं।
सामान्य परिस्थितियों में सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला की गिरफ्तारी पर कानूनी प्रतिबंध हैं। निर्धारित अपवादों में महिला पुलिस अधिकारी और मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से जुड़ी शर्तें लागू होती हैं।
सांसदों को कुछ संसदीय विशेषाधिकार मिलते हैं, लेकिन उन्हें हर आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से पूरी छूट नहीं है। वास्तविक स्थिति मामले और लागू कानून पर निर्भर करती है।
हर गिरफ्तारी के लिए कानून में निर्धारित आधार और प्रक्रिया जरूरी हैं। कुछ परिस्थितियों में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है, जबकि दूसरे मामलों में अलग कानूनी प्रक्रिया लागू होती है।
कुछ लोगों को विशेष संवैधानिक या कानूनी सुरक्षा मिलती है, लेकिन इसका मतलब हर परिस्थिति में गिरफ्तारी से पूरी छूट नहीं है। सही जानकारी के लिए लागू कानून और उसके अपवाद समझना जरूरी है।